कागज़नामा

अपरिवर्तनीय मुख़्तारनामा (वापस न लिया जा सकने वाला)

एक नज़र में

कीमत
मुफ़्त
स्टाम्प ड्यूटी
पंजाब पर लागू (तथा केन्द्र-शासित प्रदेश चंडीगढ़ तक विस्तारित) भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की अनुसूची 1-ए के अनुच्छेद 48 "मुख़्तारनामा" के अधीन प्रभार्य, जो प्राधिकृत व्यक्तियों की संख्या, क्या मुख़्तारनामा प्रतिफल हेतु दिया गया है, तथा — यहाँ सबसे अधिक महत्वपूर्ण — क्या यह मुख़्तार को अचल संपत्ति बेचने हेतु प्राधिकृत करता है, के अनुसार भिन्न उप-खंड तथा दरें रखता है।
रजिस्ट्री
केवल इसलिए स्वतः अनिवार्य नहीं कि यह मुख़्तारनामा सम्पत्ति से सम्बन्धित है — मुख़्तारनामा कार्य करने का प्राधिकार है, स्वयं अचल संपत्ति में हित अंतरित करने वाला दस्तावेज़ नहीं, अतः पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17 केवल उस आधार पर इस तक नहीं पहुँचती।
गवाह
दो साक्षी, वयस्क, इस मुख़्तारनामे के पक्षकार नहीं, इसे प्रमाणित करें चाहे यह पंजीकृत हो अथवा नहीं — पंजाब तथा चंडीगढ़ दोनों पंजीकरण कार्यालयों की प्रथा पंजीकरण अथवा अनुप्रमाणन हेतु प्रस्तुत मुख़्तारनामे हेतु इसकी अपेक्षा करती है, तथा यह उस स्थिति में भी सुदृढ़ प्रथा है जहाँ मुख़्तारनामा केवल नोटरीकृत किया जा रहा हो।

मुफ़्त

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इन नामों से भी

  • Power of Attorney Coupled with Interest
  • Irrevocable POA
  • Irrevocable Mukhtiarnama
  • Agency Coupled with Interest
  • Na-Radd Hone Wala Mukhtiarnama
  • Sthayi Mukhtar Patra
  • Irrevocable GPA
  • Power of Attorney for Consideration

कब ज़रूरत पड़ती है

जब आप पंजाब या चंडीगढ़ में किसी को मुख़्तारनामा दे रहे हों और जिसे नियुक्त कर रहे हैं (अटॉर्नी) का उस संपत्ति या अधिकार में पहले से अपना हित हो — उसने प्रतिफल चुकाया हो, पैसा लगाया हो, या विकास में निवेश किया हो — और आप चाहते हों कि बाद में आपका मन बदलने पर भी, उसकी सहमति के बिना, यह मुख़्तारनामा बना रहे।

क्या यह यहीं भरा जा सकता है

यह यहीं भरा जा सकता है

यह दस्तावेज़ आप इसी साइट पर भर सकते हैं, और कुछ भी तय करने से पहले पूरा मसौदा स्क्रीन पर पढ़ सकते हैं। यह ध्यान से तैयार किया गया प्रारूप है; आपके अपने हालात पर दी गई सलाह नहीं।

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नीचे जो लिखा है वह पंजाब और चंडीगढ़ के लिए है। इसमें वहीं की स्थिति दी गई है, यह नहीं कि यह कहाँ-कहाँ कैसे बदलती है — यानी नीचे की रकमें वही हैं जो लागू होती हैं। दरें बदलती रहती हैं, इसलिए सब-रजिस्ट्रार दफ़्तर से पक्का कर लेना ठीक रहता है। अगर प्रॉपर्टी भारत में कहीं और है, तो इनमें से कुछ भी आपके लिए नहीं है।

स्टाम्प ड्यूटी

पंजाब पर लागू (तथा केन्द्र-शासित प्रदेश चंडीगढ़ तक विस्तारित) भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की अनुसूची 1-ए के अनुच्छेद 48 "मुख़्तारनामा" के अधीन प्रभार्य, जो प्राधिकृत व्यक्तियों की संख्या, क्या मुख़्तारनामा प्रतिफल हेतु दिया गया है, तथा — यहाँ सबसे अधिक महत्वपूर्ण — क्या यह मुख़्तार को अचल संपत्ति बेचने हेतु प्राधिकृत करता है, के अनुसार भिन्न उप-खंड तथा दरें रखता है। जहाँ यह मुख़्तारनामा अचल संपत्ति के विक्रय, बन्धक अथवा अन्य अंतरण हेतु प्राधिकृत करता है (नीचे विक्रय-अधिकार खंड में पहला विकल्प) तथा प्रतिफल हेतु दिया गया है, वहाँ पंजाब तथा चंडीगढ़ की स्टाम्प अनुसूचियाँ सामान्यतः ऐसे मुख़्तारनामे को उस सम्पत्ति के अंतरण के समान यथामूल्य दर पर प्रभारित करती हैं — एक नियम जो "जीपीए विक्रय" प्रथा को रोकने हेतु सीधे लक्षित है जिसे उच्चतम न्यायालय ने Suraj Lamp में अस्वीकृत किया। जहाँ यह विक्रय हेतु प्राधिकृत नहीं करता, अथवा प्रतिफल हेतु नहीं दिया गया है, वहाँ इसके बजाय एक निम्नतर निश्चित अथवा स्लैब-आधारित अनुच्छेद 48 ड्यूटी लागू होती है। स्टाम्प पेपर ख़रीदने से पूर्व, वर्तमान में कौन-सा उप-खंड तथा आँकड़ा लागू है, तथा वर्तमान पंजीकरण शुल्क, उप-पंजीयक के काउंटर पर (पंजाब में igrpunjab.gov.in के माध्यम से; चंडीगढ़ में 30 बेज़ बिल्डिंग में) पुष्ट करें — यह दस्तावेज़ ड्यूटी का आँकड़ा नहीं छापता क्योंकि कौन-सा उप-खंड लागू होता है यह इस फ़ॉर्म द्वारा एकत्रित तथ्यों पर निर्भर करता है किन्तु स्टाम्प अधिनियम अनुसूची को स्वयं भी उनके विरुद्ध जाँचा जाना चाहिए।

रजिस्ट्री

केवल इसलिए स्वतः अनिवार्य नहीं कि यह मुख़्तारनामा सम्पत्ति से सम्बन्धित है — मुख़्तारनामा कार्य करने का प्राधिकार है, स्वयं अचल संपत्ति में हित अंतरित करने वाला दस्तावेज़ नहीं, अतः पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17 केवल उस आधार पर इस तक नहीं पहुँचती। सामान्यतः दो बातें पंजीकरण को आवश्यक अथवा व्यवहार में सही निर्णय बनाती हैं, तथा नीचे का खंड अभिलिखित करता है कि कौन-सी लागू होती है: पहला, उस अधिनियम की धारा 33 अपेक्षा करती है कि पंजीकरण हेतु दस्तावेज़ प्रस्तुत करने, अथवा मुख़्तार-प्रदाता की ओर से निष्पादन स्वीकार करने हेतु उपयोग किया जाने वाला मुख़्तारनामा, उस प्रयोजन हेतु उपयोग किए जाने से पूर्व, स्वयं एक पंजीकरण अधिकारी, मजिस्ट्रेट, अथवा (यदि भारत के बाहर निष्पादित हो) वाणिज्य-दूतावास अनुप्रमाणन सहित नोटरी द्वारा पंजीकृत अथवा अनुप्रमाणित हो — एक अनुप्रमाणित न किया गया मुख़्तारनामा काउंटर पर अस्वीकृत कर दिया जाता है। दूसरा, Suraj Lamp की पृष्ठभूमि को देखते हुए, मुख़्तार से व्यवहार करने वाला उप-पंजीयक, बैंक अथवा बाद का क्रेता, तथ्यों पर विधि का शब्द इसे बाध्य करे अथवा न करे, प्रतिफल हेतु दिए गए अप्रतिसंहरणीय, विक्रय-प्राधिकृत करने वाले मुख़्तारनामे के अधीन किए गए किसी भी कार्य को स्वीकार करने से पूर्व पंजीकृत मुख़्तारनामे पर बल देने की अधिकाधिक सम्भावना रखता है। जहाँ इनमें से कोई भी लागू हो, इस मुख़्तारनामे को पंजीकरण हेतु उस तहसील के उप-पंजीयक के समक्ष प्रस्तुत करें जहाँ मुख़्तार-प्रदाता निवास करता है अथवा सम्पत्ति स्थित है, पंजाब में, अथवा उप-पंजीयक, केन्द्र-शासित प्रदेश चंडीगढ़ के समक्ष, चंडीगढ़ में।

नोटरी

जहाँ यह मुख़्तारनामा पंजीकृत नहीं किया जा रहा हो, वहाँ इसे पंजाब अथवा चंडीगढ़ में शपथ आयुक्त अथवा नोटरी पब्लिक के समक्ष नोटरीकृत कराएँ, जो इस भार के दस्तावेज़ हेतु अधिकांश बैंक, क्रेता तथा सरकारी कार्यालय न्यूनतम अपेक्षा रखते हैं। यदि मुख़्तार-प्रदाता भारत के बाहर है, तो भारत में उपयोग अथवा पंजीकृत किए जाने से पूर्व मुख़्तारनामे को स्थानीय नोटरीकरण के अतिरिक्त वाणिज्य-दूतावास अनुप्रमाणन (अथवा एपोस्टिल, जहाँ गंतव्य देश हेग एपोस्टिल कन्वेंशन का सदस्य हो) की आवश्यकता है।

गवाह

दो साक्षी, वयस्क, इस मुख़्तारनामे के पक्षकार नहीं, इसे प्रमाणित करें चाहे यह पंजीकृत हो अथवा नहीं — पंजाब तथा चंडीगढ़ दोनों पंजीकरण कार्यालयों की प्रथा पंजीकरण अथवा अनुप्रमाणन हेतु प्रस्तुत मुख़्तारनामे हेतु इसकी अपेक्षा करती है, तथा यह उस स्थिति में भी सुदृढ़ प्रथा है जहाँ मुख़्तारनामा केवल नोटरीकृत किया जा रहा हो।

स्टाम्प पेपर का अनुरोध करें

Sample preview — placeholder answers, not your data

IRREVOCABLE POWER OF ATTORNEY

I, Balwant Singh Cheema, son/daughter/wife of Late Sh. Kartar Singh Cheema, residing at House No. 2211, Sector 15-C, Chandigarh 160015, PAN AAAPB1234C (the "Principal"), do hereby appoint, constitute and nominate:

Ekta Developers, through its partner Rakesh Mittal, son/daughter/wife of X, of SCO 212, Sector 34-A, Chandigarh 160022, PAN X (the "Attorney"),

to be my true and lawful attorney, in my name and on my behalf, in respect of the property and powers described below, upon the terms and subject to the conditions of this Power.

RECITALS

A. The subject matter of this Power is: Plot No. 412, Sector 82, S.A.S. Nagar (Mohali), measuring 300 square yards, more particularly described in the Schedule.

B. The Attorney has an interest in that subject matter, namely that the Attorney has paid consideration for the property or right described below, under an agreement to sell, an allotment or a similar arrangement, and holds an interest in it that pre-dates this Power. Particulars: Agreement to Sell dated 4 February 2026 between the Principal and the Attorney for Rs 68,00,000, of which Rs 20,00,000 has been paid as earnest money, receipt whereof the Principal acknowledges.

C. The amount of consideration or advance involved is ₹20,00,000 (Rupees Twenty Lakh only).

D. Because the Attorney has an interest of their own in the subject matter of this Power, the Principal grants this Power as one coupled with interest within the meaning of s.202 of the Indian Contract Act, 1872, and intends it to be irrevocable to the extent stated in clause 5 below.

E. THIS POWER DOES NOT TRANSFER OWNERSHIP OF ANY IMMOVABLE PROPERTY. In Suraj Lamp & Industries Pvt. Ltd. v. State of Haryana, (2012) 1 SCC 656, the Supreme Court of India held that immovable property can be transferred only by a registered instrument of conveyance, and that a power of attorney is an instrument of agency, not of transfer. Nothing done by the Attorney under this Power passes title to any immovable property; title passes, if at all, only by a separate registered Sale Deed, Gift Deed or Exchange Deed executed in accordance with law.

NOW THIS POWER OF ATTORNEY WITNESSES as follows.

  1. 1. APPOINTMENT

1.1 The Principal appoints the Attorney as the Principal's true and lawful attorney, to do the acts described in clause 6 and clause 7 in relation to the subject matter described in Recital A, in the Principal's name and on the Principal's behalf, as fully and effectually as the Principal could do personally.

  1. 2. THE SUBJECT MATTER

2.1 This Power relates only to: Plot No. 412, Sector 82, S.A.S. Nagar (Mohali), measuring 300 square yards, more particularly described in the Schedule, more particularly described, where necessary, in the Schedule to this Power. The Attorney has no authority under this Power in respect of any other property or right of the Principal.

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