वसीयत Vasiyat

वसीयत एक लिखित बयान है कि आपकी मृत्यु के बाद जो कुछ आपका है, वह किसे मिलेगा, उसे कौन इकट्ठा करके बाँटेगा (एक्ज़ीक्यूटर) और नाबालिग बच्चों को कौन सँभालेगा। अठारह साल या उससे ज़्यादा उम्र का और मानसिक रूप से स्वस्थ कोई भी व्यक्ति वसीयत कर सकता है।

इन नामों से भी लिखा जाता है

    • Vasiyatnama
    • Wasiyat
    • Wasiyatnama
    • Will
    • Last Will and Testament
    • वसीयत
    • वसीयतनामा
    • ਵਸੀਅਤ
    • ਵਸੀਅਤਨਾਮਾ

यह किस काम आता है

  • अपनी मर्ज़ी लिखित में कहने के लिए, जब आप ख़ुद अपनी वजहें समझा सकते हैं: किसे क्या मिलेगा, और एक्ज़ीक्यूटर तथा संरक्षक कौन होगा। इससे वे झगड़े टलते हैं जो वसीयत के बिना किसी के गुज़रते ही शुरू हो जाते हैं।
  • वसीयत में घर या प्लॉट, जमाबंदी में दर्ज ज़मीन, चंडीगढ़ की एस्टेट ऑफ़िस या हाउसिंग बोर्ड की प्रॉपर्टी, बैंक खाते, शेयर, गहने और गाड़ियाँ आ सकती हैं।
  • किसी की मृत्यु के बाद चंडीगढ़ एस्टेट ऑफ़िस, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड या गमाडा से मिली प्रॉपर्टी वसीयत के आधार पर उस संस्था के अपने फ़ॉर्मों से अपने नाम कराई जाती है।

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वसीयत के बारे में सवाल

क्या वसीयत की रजिस्ट्री कराना ज़रूरी है?

नहीं। वसीयत की रजिस्ट्री ज़रूरी नहीं है, और जिस बिना-रजिस्ट्री वाली वसीयत पर ठीक से हस्ताक्षर हुए हों और दो गवाहों ने सत्यापित किया हो, वह पूरी तरह मान्य है। रजिस्ट्री सिर्फ़ इतना सबूत जोड़ती है कि यही कागज़ उस तारीख़ को मौजूद था जिस दिन रजिस्ट्री हुई।

वसीयत पर गवाह कौन बन सकता है?

दो सत्यापन करने वाले गवाह, जिनमें से कोई भी (और उनका जीवनसाथी) वसीयत का लाभार्थी न हो। किसी गवाह या गवाह के जीवनसाथी को दिया गया हिस्सा रद्द हो जाता है, पर बाक़ी वसीयत मान्य रहती है।

क्या मैं वसीयत बाद में बदल सकता हूँ?

हाँ। कोई छोटा बदलाव, जैसे एक चीज़ जोड़ना या बदलना, कोडिसिल (पूरक) में लिखा जाता है। पूरी वसीयत रद्द करनी हो, तो "वसीयत रद्द करने" वाला कागज़ इस्तेमाल होता है। लाइब्रेरी में दोनों हैं।

शब्दावली के सभी शब्द

यह पन्ना पंजाब और चंडीगढ़ के लिए इस शब्द को आसान भाषा में समझाता है। यह कानूनी सलाह नहीं है। फ़ीस, दफ़्तर और समय-सीमाएँ बदल सकती हैं, इसलिए कुछ करने से पहले दफ़्तर या किसी वकील से पूछ लें।