हक़ त्याग Haq Tyag

हक़ त्याग का मतलब है त्याग: एक सह-मालिक अपना अविभाजित हिस्सा बाक़ी सह-मालिकों को देता है, आमतौर पर रजिस्ट्री वाले त्याग पत्र (डीड) से। पंजाब में यह ज़्यादातर किसी की मृत्यु के बाद होता है, जब बेटियों जैसे वारिस अपना हिस्सा माँ या खेती करने वाले बेटे के नाम छोड़ते हैं।

इन नामों से भी लिखा जाता है

    • Haq Tyag Patra
    • Haq Tyag Nama
    • Release Deed
    • Deed of Relinquishment
    • Dastbardari
    • हक़ त्याग
    • हक त्याग
    • हक त्याग पत्र
    • त्याग पत्र
    • दस्तबरदारी
    • ਹੱਕ ਤਿਆਗ
    • ਹੱਕ ਤਿਆਗ ਪੱਤਰ
    • ਤਿਆਗ ਪੱਤਰ
    • ਦਸਤਬਰਦਾਰੀ

यह किस काम आता है

  • बिना बेचे अपना हिस्सा छोड़ने के लिए। यह पैसे के लेन-देन के साथ भी चलता है और बिना पैसे के भी: भुगतान ख़ाली छोड़ने पर यह सिर्फ़ प्यार-स्नेह या पारिवारिक इंतज़ाम से किया गया त्याग दर्ज होता है।
  • हक़ त्याग से हिस्से कम मालिकों के पास जुड़ जाते हैं। अगर परिवार प्रॉपर्टी का असल बँटवारा चाहता है, तो दूसरा रास्ता बँटवारा है।

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हक़ त्याग के बारे में सवाल

क्या मैं ऐसे व्यक्ति को अपना हिस्सा छोड़ सकता हूँ जो पहले से सह-मालिक नहीं है?

नहीं। हक़ त्याग सिर्फ़ उन लोगों के बीच चलता है जो प्रॉपर्टी के पहले से सह-मालिक हैं। इस समूह से बाहर किसी को हिस्सा देना बिक्री या दान होता है, जिसकी डीड और ख़र्च अलग होते हैं।

क्या हक़ त्याग की रजिस्ट्री के बाद मैं अपना मन बदल सकता हूँ?

नहीं। रजिस्ट्री के बाद त्याग अंतिम माना जाता है। इसे सिर्फ़ ऐसी नई डीड से पलटा जा सकता है जिस पर सभी पक्ष हस्ताक्षर करने को राज़ी हों, या अदालत से।

क्या हक़ त्याग से ज़मीन का रिकॉर्ड अपने-आप अपडेट हो जाता है?

अपने-आप नहीं। रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू करती है, उसे पूरा नहीं करती। पंजाब में पटवारी इंतकाल दर्ज करता है और सर्कल रेवेन्यू ऑफ़िसर मंज़ूर करता है; चंडीगढ़ की सेक्टर वाली प्रॉपर्टी रजिस्ट्री पर एस्टेट ऑफ़िस से अपडेट होती है; चंडीगढ़ के रेवेन्यू गाँव की ज़मीन के लिए इंतकाल का अलग आवेदन चाहिए।

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यह पन्ना पंजाब और चंडीगढ़ के लिए इस शब्द को आसान भाषा में समझाता है। यह कानूनी सलाह नहीं है। फ़ीस, दफ़्तर और समय-सीमाएँ बदल सकती हैं, इसलिए कुछ करने से पहले दफ़्तर या किसी वकील से पूछ लें।