बिल्कुल मुफ़्त। बिना लॉगिन। कोई सीमा नहीं।
किराया रसीद जनरेटर
इसे एक बार भरें और हर महीने की एक रसीद पाएँ, मकान मालिक के दस्तख़त और आपके नियोक्ता को देने के लिए तैयार।
सब कुछ आपके ब्राउज़र में रहता है, कुछ भी अपलोड नहीं होता। आपकी जानकारी सिर्फ़ इसी डिवाइस पर याद रखी जाती है, ताकि अगले साल एक क्लिक में काम हो जाए।
कौन किसे देता है
HRA के लिए PAN तब चाहिए जब साल का किराया ₹1,00,000 से ज़्यादा हो।
किराया
कौन से महीने
रसीद पर
₹5,000 से ज़्यादा की नकद रसीद पर चाहिए।
सादे सफ़ेद काग़ज़ पर फ़ोटो या स्कैन। यह इसी डिवाइस पर रहती है।
रसीद अंग्रेज़ी में छपती है, ताकि आपके नियोक्ता का दफ़्तर उसे पढ़ सके। नाम और पते किसी भी भाषा में लिख सकते हैं।
आम सवाल
HRA के लिए किराया रसीद क्यों चाहिए?
अगर आपकी तनख़्वाह में मकान किराया भत्ता (HRA) है और आप पुरानी टैक्स व्यवस्था में हैं, तो उसका एक हिस्सा टैक्स-मुक्त हो सकता है, पर सिर्फ़ उस किराये पर जो आपने सचमुच दिया हो। किरायानामा बताता है कि कितना किराया तय है। रसीद बताती है कि आपने वह हर महीने दिया। नियोक्ता आमतौर पर यह लाभ देने से पहले रसीदें माँगता है, और टैक्स विभाग बाद में भी माँग सकता है। नई टैक्स व्यवस्था में HRA का यह लाभ नहीं मिलता, पर रसीद फिर भी भुगतान का अच्छा सबूत है।
मकान मालिक का PAN कब चाहिए?
जब साल भर में दिया गया किराया ₹1,00,000 से ज़्यादा हो, यानी लगभग ₹8,333 महीना, तो HRA के लिए नियोक्ता को मकान मालिक का PAN चाहिए। इससे कम पर आप इसे छोड़ सकते हैं। अगर मकान मालिक के पास सचमुच PAN नहीं है, तो यह खाना ख़ाली छोड़ दें और उनसे इस बात की दस्तख़त वाली घोषणा लेकर नियोक्ता को दें।
राजस्व टिकट कब चाहिए?
जब किराया नकद दिया गया हो और रसीद ₹5,000 से ज़्यादा की हो। रसीद पर ₹1 का राजस्व टिकट लगता है और मकान मालिक उसके आर-पार दस्तख़त करता है (अनुच्छेद 53, भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899)। पंजाब और चंडीगढ़ में यह एक जैसा है। UPI, बैंक ट्रांसफ़र या चेक में भुगतान का रिकॉर्ड ही सबूत होता है और टिकट आमतौर पर नहीं माँगा जाता।