कागज़नामा

संपत्ति किराये पर देने और संभालने का मुख़्तारनामा

एक नज़र में

कीमत
मुफ़्त

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दस्तावेज़ मुफ़्त हैं। केवल किट के पैसे लगते हैं।

मुफ़्त: एक दिन में 5 दस्तावेज़ तक।

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इन नामों से भी

  • Special power of attorney for letting and rent collection
  • Property management POA
  • Rent collection power of attorney
  • Landlord's power of attorney
  • NRI property management POA
  • Mukhtarnama-e-Khas
  • Am-Mukhtarnama
  • Kul Mukhtarnama (the general form, which is wider than this one)

कब ज़रूरत पड़ती है

सीमित मुख़्तारनामा, जिससे मालिक का चुना हुआ व्यक्ति रोज़मर्रा संपत्ति को किराये पर दे और चलाए — विज्ञापन देना, किरायानामा करना, किराया और डिपॉज़िट लेना, सोसाइटी से निपटना, बक़ाये भरना, मरम्मत कराना और पैसे का हिसाब देना। विदेश या दूसरी जगह रहने वाले मालिक के लिए आम तौर पर यही चलता है।

क्या यह यहीं भरा जा सकता है

यह यहीं भरा जा सकता है

यह दस्तावेज़ आप इसी साइट पर भर सकते हैं, और कुछ भी तय करने से पहले पूरा मसौदा स्क्रीन पर पढ़ सकते हैं। यह ध्यान से तैयार किया गया प्रारूप है; आपके अपने हालात पर दी गई सलाह नहीं।

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स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्री और गवाह देखें

नीचे इस तरह के दस्तावेज़ की सामान्य स्थिति दी गई है। रकम उस राज्य के हिसाब से तय होती है जहाँ प्रॉपर्टी है, और वह बदलती रहती है — इसलिए कुछ भी भरने से पहले अपने राज्य का आँकड़ा सब-रजिस्ट्रार दफ़्तर से पक्का कर लेना ठीक रहता है।

स्टाम्प ड्यूटी

अनुच्छेद 48; केवल किराया/प्रबंधन, कोई बिक्री नहीं — सामान्य 'कोई अन्य मामला' प्रविष्टि, एक मामूली निश्चित शुल्क, मूल्यानुसार नहीं; पारिवारिक रियायत तथा विक्रय-पत्र-दर उपचार केवल बिक्री-शक्ति से जुड़ता है। शुल्क हस्ताक्षर के राज्य का अनुसरण करता है: जहाँ संपत्ति स्थित है वहीं हस्ताक्षर करें और बस यही करना है; कहीं और हस्ताक्षर करें, तो जहाँ संपत्ति स्थित है वहाँ उपयोग किए जाने पर उस राज्य का अंतर शुल्क भी अदा करें। विदेश में हस्ताक्षरित: प्राप्ति के तीन महीने के भीतर स्टाम्प करें (धारा 18)। किराया अनुबंध पर स्वयं अलग शुल्क लगता है।

रजिस्ट्री

स्वयं अनिवार्य रूप से रजिस्टर-योग्य नहीं है — कोई हित उत्पन्न नहीं करता, इसलिए धारा 17(1)(ख) लागू नहीं होती; यह बिक्री या विकास की शक्ति नहीं है, इसलिए कोई अन्य प्रावधान भी इसे रजिस्टर-योग्य नहीं बनाता। असली बात धारा 33 है: यदि मुख़्तार को किसी रजिस्टर-योग्य किराया अनुबंध का निष्पादन स्वीकार करना या उसे प्रस्तुत करना है, तो अधिकार को धारा 33 को संतुष्ट करना होगा, जो मुख़्तार-दाता के निवास पर निर्भर करता है। मुख़्तार-दाता भारत में: धारा 33(1)(क) — मुख़्तार-दाता के अपने जिले के रजिस्ट्रार/सब-रजिस्ट्रार द्वारा प्रमाणित, संपत्ति के जिले के नहीं (मोहाली में फ्लैट रखने वाला लुधियाना का मालिक लुधियाना में प्रमाणित करता है); केवल नोटरीकृत होना योग्य नहीं है। मुख़्तार-दाता विदेश में: धारा 33(1)(ग) — नोटरी, न्यायालय, न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट, या भारतीय वाणिज्य दूत। यह क्यों मायने रखता है: एक वर्ष से अधिक के पट्टे अनिवार्य रूप से रजिस्टर-योग्य हैं (धारा 17(1)(घ)), और पंजाब तथा चंडीगढ़ में सार रूप में पट्टा होने वाला "लाइसेंस" पट्टा ही माना जाता है — यदि मुख़्तार दस्तावेज़ प्रस्तुत करेगा तो अपने निवास से मेल खाता धारा 33 मार्ग उपयोग करें।

नोटरी

भारत में हस्ताक्षरित: नोटरी अधिनियम 1952 के तहत नोटरी, दोनों पक्षों के फोटो पहचान-पत्र, रजिस्टर प्रविष्टि — पर्याप्त है जहाँ मुख़्तार केवल अनुबंधों पर हस्ताक्षर करता है तथा सोसाइटी/बैंकों/उपयोगिताओं से व्यवहार करता है, प्रस्तुतीकरण के लिए पर्याप्त नहीं। जहाँ मुख़्तार-दाता भारत में है तथा प्रस्तुतीकरण आवश्यक है, धारा 33(1)(क) को मुख़्तार-दाता के अपने जिले के रजिस्ट्रार/सब-रजिस्ट्रार प्रमाणीकरण की आवश्यकता है; केवल नोटरीकृत होना योग्य नहीं है। विदेश में हस्ताक्षरित: वहाँ नोटरीकरण साथ ही एपोस्टिल या दूतावास/वाणिज्य दूतावास सत्यापन; धारा 33(1)(ग) विदेश में मुख़्तार-दाता के लिए नोटरी, न्यायालय, न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट या वाणिज्य दूत को मान्यता देती है, हालाँकि सब-रजिस्ट्रार अक्सर फिर भी वाणिज्य दूतावास सत्यापन पसंद करते हैं। भारत में तीन महीने के भीतर स्टाम्प करें।

गवाह

कोई कानून अनुप्रमाणन की अपेक्षा नहीं करता (वसीयत, धारा 63, या बंधक, धारा 59 के विपरीत) परंतु दो वयस्क गवाह सार्वभौमिक हैं तथा बैंकों/सोसाइटियों/सब-रजिस्ट्रारों द्वारा अपेक्षित हैं — पूरे नाम, पते, पहचान-पत्र, कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं जो मुख़्तार, कोई किरायेदार, या अन्यथा लाभान्वित हो। रजिस्ट्रेशन पर, धारा 32ए को प्रस्तुतकर्ता की फोटो और फिंगरप्रिंट चाहिए। मुख़्तार-दाता से मुख़्तार के नमूना हस्ताक्षर का अनुप्रमाणन करवाएं।

स्टाम्प पेपर का अनुरोध करें

Sample preview — placeholder answers, not your data

POWER OF ATTORNEY FOR LETTING AND MANAGING A PROPERTY

This is not a power to sell, gift, exchange or mortgage. It conveys no title.

Executed at Dubai, United Arab Emirates on 1 April 2026.

1. The Principal

I, Meera Anand, daughter of Shri Ramesh Kumar Anand, aged 46 years, residing at Villa 27, Al Barsha 2, Dubai, United Arab Emirates, holding identity document Indian passport no. Z1234567 ("the Principal", "I", "me", "my"), whose residential status is: Resident in India, execute this Power of Attorney.

2. The Attorney

I appoint Vikram Anand, son of Shri Ramesh Kumar Anand, aged 52 years, residing at B-14, Sarvodaya Enclave, New Delhi 110017, being my elder brother ("the Attorney"), to be my lawful attorney for the limited purposes set out below, and for no other purpose.

3. The Property

Flat No. 802 on the 8th floor of 'Sea Breeze' Co-operative Housing Society Ltd., admeasuring 780 sq ft carpet area, together with one covered car parking space, constructed on land bearing CTS No. 421/B, situated at Sea Breeze CHS Ltd., Carter Road, Bandra West, Mumbai 400050, in the State or Union Territory of Andhra Pradesh ("the Property").

4. My title

I purchased the Property under a Deed of Sale dated 12 June 2014, registered as document no. BDR-4/5521/2014 in the office of the Sub-Registrar of Assurances, Bandra, and I have been in peaceful possession of it since then.

5. Why I am granting this Power

I am unable to attend personally to the letting and day-to-day management of the Property, and I wish the Attorney to do so on my behalf, on the terms and within the limits set out here.

6. Nature and limits of this Power — read this first

6.1 This is a power of agency only. It does not sell, transfer, gift, exchange, mortgage, charge, release or otherwise dispose of the Property or any part of it, and it creates no right, title or interest in the Property in favour of the Attorney.

6.2 A power of attorney is not a conveyance. In Suraj Lamp & Industries (P) Ltd. v. State of Haryana, (2012) 1 SCC 656 the Supreme Court held that a transaction carried out by a power of attorney, an agreement to sell and a will does not convey title to immovable property. No person may treat this Power, alone or with any other writing, as evidence that the Property or any interest in it has been transferred to the Attorney or to anyone else.

6.3 The Attorney must not sell, agree to sell, gift, exchange, mortgage, charge, create any lien over, surrender, relinquish, partition or part with ownership of the Property; must not accept earnest money, advance or sale consideration for it; must not offer it as security for any borrowing by anyone; and must not create any interest in it other than a letting expressly permitted by this Power.

इस दस्तावेज़ के साथ अक्सर ये भी चाहिए

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